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सच यह है..ढोल गंवार शूद्र पशु नारी । सकल ताड़ना के अधिकारी ।।

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। श्रीहरिः।   ढोल गंवार शूद्र पशु नारी । "सकल ताड़ना के अधिकारी"।। ------------------------------------ अभी श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई पर हंगामा मचा पड़ा है, हंगामा करने वाले पूरी चौपाई बता ही नहीं रहे, बस अंत की दो पंक्ति बताते फिर रहे हैं, क्योंकि उनका एजेंडा वहीं सेट हो रहा है, पंक्ति हैं-  ढोल गंवार सूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी पूरी चौपाई पढ़े तो समझ आएगा कि ताड़ना शब्द किस सन्दर्भ में प्रयुक्त हो रहा है। पूरी चौपाई इस प्रकार है- प्रभु भल किन्ह मोहि सिख दीनी मरजादा पुनि तुम्हरी किन्ही। ढोल गंवार सूद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी।। इस चौपाई की प्रथम पंक्ति में स्पष्ट हो रहा है कि प्रभु ने भला किया कि मुझे शिक्षा दी, अब इसी शिक्षा को कुछ अन्य तरह से तुलसीदासजी ने समझाने के लिए ढोल गंवार सूद्र पशु नारी का उदाहरण दिया। अब कुछ लोग कहेंगे कि चलो माना कि गंवार शुद्र और नारी को तो ताड़ना का अर्थ शिक्षित करना मान लेंगे परन्तु ढोल और पशु को कैसे शिक्षा दी जा सकती है ? दरअसल मेरा मानना तो यह है कि जो श्रीरामचरितमानस पर उंगली उठाता है, उसने न तो अवधी भाषा पढ़ी और न ह...